विभिन्न विधियों द्वारा स्थान एकलों का निर्माण

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विभिन्न विधियों द्वारा स्थान एकलों का निर्माण

2.1 स्थान पक्ष के स्तर
2.2  3. स्थान पक्ष का प्रायोगिक उपयोग
3.1 राजनीतिक विभाजन। 
3.5 स्थान पक्ष के विभाजनों का क्रम  5.  6. सारांश 7. अभ्यासार्थ प्रश्न 8. मुख्य शब्द
9. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची। 1. विषय प्रवेश
आप देख चुके हैं कि डॉ. रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति पांच मूलभूत श्रेणियों की अवधारणा पर आधारित है। उनके अनुसार वर्गीकरण का आधार किसी विषय में निहित विशेषताएं होती हैं। ये विशेषताएं इतनी अधिक होती हैं कि इन्हें अपेक्षाकृत छोटे-छोटे मौलिक पहलुओं में विभाजित करना आवश्यक हो जाता है। विषय में निहित इन विशेषताओं का विघटन पांच मूलभूत श्रेणियों में किया जा सकता है- काल [T], स्थान [S], ऊर्जा [E], पदार्थ [M], और व्यक्तित्व [P]। वस्तुतः किसी विषय में निहित विशेषताओं को दर्शाने वाले ये पांच पक्ष है। विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति इसी अवधारणा पर आधारित है। रंगनाथन ने वर्षों के अध्ययन के बाद इनका उपयोग अपनी विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में किया है। बाद में इनका उपयोग सामान्य वर्गीकरण पद्धति व गहन वर्गीकरण पद्धतियों के निर्माण में किया गया।

104- स्थान पक्ष तालिका. विश्लेषण

प्रस्तुत इकाई में विबिन्दु वर्गीकरण के छठवें संशोधित संस्करण में प्रयुक्त स्थान पक्ष प्रायोगिक उपयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई है। 2. स्थान पक्ष-सामान्य परिचय
जब किसी विषय का अध्ययन किसी भौगोलिक क्षेत्र के संदर्भ में किया जाता है तो स्थान एकल की आवश्यकता होती है। विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में एकलों का उल्लेख अनुसूची के भाग 2 में दी गई तालिका 4 में किया गया है। रंगनाथन ने इन्हें प्रमुख रूप से थल-क्षेत्र तथा जल-क्षेत्र दो भागों में विभक्त किया है। थल-क्षेत्र के रूप में महाद्वीपों और उनके अन्तर्गत आने वाले देशों, प्रदेशों, शहरों आदि का उल्लेख किया है जबकि प्राकृतिक विशेषताओं वाले क्षेत्रों के रूप में झील, नदी, घाटी, पर्वत इत्यादि का उल्लेख है। जल क्षेत्र के रूप में महासागरों का उल्लेख है। इस प्रकार स्थान एकलों संबंधी तालिका में महाद्वीपों का, महाद्वीपों के अन्तर्गत
आने वाले देशों का, देशों के अन्तर्गत आने वाले प्रदेशों का तथा प्रदेशों के शहरों इत्यादि का विस्तार से उल्लेख किया गया है। अन्य प्रकार के भौगोलिक एकलों के वर्गीकों के लिये अनुसूची के नियम भाग में आवश्यक संशोधन किये गये है। इन्हें स्थान पक्ष के स्तरों के रूप में प्राप्त किया जा सकता है। भौगोलिक स्थान एकलों को यदि दिशानुसार निर्दिष्ट करने की आवश्यकता हो तो इसका प्रावधान भी संशोधन करके किया गया है। ये संशोधन परिशिष्ट के पृष्ठ 20 से 23 पर दिये गये हैं। इनका विवेचन इस इकाई के आगे के पृष्ठों में किया गया है।

3.2 जनसंख्या समूह विभाजन 2.1 स्थान पक्ष के स्तर ।

विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति के छठवें संस्करण के भाग 2 की तालिका 4 में स्थान एकलों के दो स्तरों का उल्लेख है। पहला स्तर [S] राजनीतिक विभागों के रूप में दिया गया है। इसके अन्तर्गत विश्व के महाद्वीपों, महाद्वीप के अन्तर्गत आने वाले देशों तथा देशों के शहरों तथा प्रमुख पांच महासागरों के वर्गीकों का उल्लेख है। उदाहरणार्थ -
1 विश्व 4 एशिया महाद्वीप 5 यूरोप महाद्वीप 8 आस्ट्रेलिया महाद्वीप 95 हिन्द महासागर इत्यादि
दूसरा स्तर [S2] प्राकृतिक विभागों के रूप में दिया गया है। इसके अन्तर्गत पर्वत, झील, नदी, घाटी, इत्यादि के वर्गीक दिये गये हैं। इन एकलों को संशोधित कर पुनर्मुद्रित संस्करण के परिशिष्ट पृष्ठ 26 पर दिया गया है । जैसे
g7 पर्वत f जंगल g1 घाटी इत्यादि
प्रायोगिक वर्गीकरण के लिये उपर्युक्त दो स्तरों को अपर्याप्त समझते हुये, छठवें संस्करण के नियम भाग में कतिपय संशोधन कर अन्य दो स्तरों का और प्रावधान किया गया है। ये दो स्तर जनसंख्या समूह विभाजन तथा दिशानुसार विभाजनों के रूप में दिये गये हैं। 105
जनसंख्या समूह विभाजन के आधार पर किसी देश, राज्य, जिला इत्यादि को आवश्यकतानुसार छोटे-छोटे क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है। इन्हें राजनीतिक विभाजन के स्तर के रूप में प्राप्त किया जाता है इसलिये स्थान पक्ष के संयोजन चिंह बिन्दु (.) का प्रयोग किया जाता है और शहर के नाम को वर्णक्रम विधि से प्राप्त करने का प्रावधान है। जैसे:

3.3 दिशानुसार विभाजन 3.4 प्राकृतिक विभाजन;

Paris (France) 53.P। Churu (Rajasthan) 4437.C
स्थान पक्ष के चौथे स्तर के रूप में दिशानुसार विभाजनों के वर्गीक निर्मित करने का प्रावधान है। इन एकलों का उल्लेख तालिका के पृष्ठ 2.8 पर एकल संख्या 1 विश्व के दिशासूचक वर्गीकों का उल्लेख करते हुये किया गया है। जैसे
Western region of the world 19M Far Eastern Counteres 19E इत्यादि।
इस प्रकार विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में स्थान पक्ष के एकलों को कुल चार खण्डों (blocks) में विभाजित कर, निम्नलिखित चार स्तर निर्मित किये हैं
1. राजनीतिक विभाजन (Political divisions) 2. प्राकृतिक विभाजन (Physical features) 3. जनसंख्या समूह विभाजन (Population clusters)
4. दिशानुसार विभाजन (Orientation divisions)

4. स्थान पक्ष का भौगोलिक विधि के रूप में प्रायोगिक उपयोग

प्राकृतिक विशेषताओं पर आधारित विभाजन खण्ड 1 का निर्माण करते है और उन्हें मण्डल 1(Zone 1) में रखा गया है। इनके लिये रोमन छोटे अक्षरों का प्रयोग किया गया है, जबकि बहुतायत से प्रयोग में आने वाले राजनीतिक विभाजनों से संबंधित एकल खण्ड 2 का निर्माण करते हैं और इन्हें मण्डल 2 (Zone 2) में रखा गया है। इनके लिये इण्डो-अरब संख्याकों का प्रयोग किया गया है। जनसंख्या समूह विभाजन खण्ड 3 का निर्माण करते हैं और इन्हें मण्डल 3 (Zone 3) के अन्तिम सेक्टर में रखा गया है। इनकी एकल संख्याओं को वर्णक्रम विधि (A.D.) से प्राप्त किया जाता है। दिशानुसार विभाजन खण्ड 3 का निर्माण करते है और इन्हें भी मण्डल 3 के Penultimate sector में रखा गया है। दूसरे शब्दों में इसकी प्रत्येक एकल संख्या का प्रारंभिक अंक 9 रिक्तांक होता है और दूसरा अंक रोमन दीर्घाक्षर। इनका उल्लेख भौगोलिक एकल संख्या 1 विश्व के अन्तर्गत किया गया है। 2.2 स्थान एकल तालिका 4 : विश्लेषण
स्थान एकल तालिका 4, पद्धति के भाग (पृष्ठ 2.8 से 2.25) पर दी गई है। इस तालिका में स्थान एकलों के लिये भारत-अरब संख्यांकों (Indo-Arabic Numberals) और रोमन लघु अक्षरों (Roman Small Letters) का प्रयोग किया गया है।
इस तालिका का अंक 1 विश्व के लिये प्रयोग में लिया गया है तथा अंक 4 से 8 तक का प्रयोग विश्व के पांच महाद्वीपों (एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमरीका, आस्ट्रेलिया) के लिये किया गया है। अंक 9 का प्रयोग प्रशान्त महासागर के भूभागों (द्वीप व द्वीप समूहों) तथा विश्व के पांच बड़े महासागरों (हिन्द, एटलांटिक, प्रशान्त, एंटार्कटिक, आर्कटिक) के लिये हुआ है।

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